बड़े हनुमान मंदिर प्रयागराज
बड़े हनुमान मंदिर संगम के पास स्तिथ है | यह मुर्ती वीर मुद्रा में है जिनके बड़े हाथ और बलिस्थ शरीर है | हनुमान भक्त इस हनुमान प्रितिमा को देखकर वीररस से भर जाते है | यह मंदिर तीर्थराज प्रयाग के करीब तीनो महानदियो गंगा , यमुना और सरस्वती के संगम पर है |
हनुमानजी के दाये पैर के निचे अहिरावन और बाये पैर के निचे अहिरावन की आराध्य देवी कमादा देवी है | इसी मूरत के पास श्री राम और लक्ष्मन जी की मुर्तिया स्तिथ है |
इस मंदिर का इतिहास :
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कन्नोज शहर में एक बड़ा धनवान व्यापारी रह्ता था पर उसके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं था | उसने इस बात पर एक हनुमान जी का मंदिर निर्माण करने की ठान ली | वह विन्दाचल पर्वतमाला में बालाजी के मंदिर का निर्माण पुत्र पाने की आश में करा दिया और बड़े भारी पत्थर से हनुमान जी की मुर्त का निर्माण करवाया | मूरत निर्माण के बाद व्यापारी ने इस हनुमान मूरत को विभिन्न तीर्थ जगह पर स्नान करवाया | जब व्यापारी प्रयाग तीर्थ पर स्नान करवा रहा था उसी रात को सपने में हनुमान जी ने उसे इस मुर्ती को यही छोड़ने के निर्देश दिए | हनुमान के कहने पर व्यापारी ने उस प्रतिमा को वही छोड़कर अपने शहर कन्नोज चला गया |
समय बितता रहा और उसे एक हनुमान कृपा से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई |
व्यापारी अपने पुरे परिवार के साथ उसी बड़े हनुमानजी के मंदिर आशिष
प्राप्ति के लिए आया |
समय के साथ यह मूरत पवित्र पानी में समा गयी और फिर समय के साथ मिटटी से ढक
गयी
बहूत समय बाद प्रयाग के संगम पर तपस्वी महात्मा बालागिरी बाघ की खाल पहने
हुए माघ के पवित्र महिने में आये और संगम में दुबकी ली | उन्हें अह्सास
हुआ की पास में कही हनुमान की मूरत है | अपने दिव्या त्रिशूल को जमीन में
अलग अलग जगह डाल कर एक जगह पाया की मूरत इस जगह है | आस पास के लोगो के साथ
उस जगह की खुदाई की गयी और हनुमान जी की मूरत को लेटा हुआ पाया गया |
उन सभी ने लाखो कोशिश की , की मूरत को सीधा खड़ा कर दे पर वो सभी असफल रहे |
यही हनुमंत आज्ञा मानकर मंदिर का निर्माण कर दिया गया जो आज बड़े हनुमान
मंदिर के नाम से जाना जाता है |
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