सालासर बालाजी मंदिर
Salasar Balaji Temple Information in Hindi . जयपुर बीकानेर सडक मार्ग पर स्थित सालासर धाम हनुमान भक्तों के बीच सिद्घपीठ शक्ति स्थल के रूप में जाना जाता है । सालासर कस्बा, राजस्थान में चुरू जिले का एक हिस्सा है और यह जयपुर - बीकानेर राजमार्ग NH 11 पर स्थित है. यह मंदिर सीकर से 57 किलोमीटर, सुजानगढ़ से 24 किलोमीटर और लक्ष्मणगढ़ से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | इस मंदिर में सालासर वाले बाला का होना बालाजी के चमत्कारों में से एक चमत्कार है।
सालासर बालाजी के दाढ़ी-मूंछ वाला एकमात्र मंदिर
भारतवर्ष के समस्त बालाजी के मन्दिरों में सालासर बालाजी के अलावा किसी ओर मन्दिर में बालाजी के दाढ़ी-मूंछ नहीं है। इसका कारण यह बताया जाता है कि मोहनदास जी ने बालाजी के पहले दर्शन दाढ़ी-मूंछ के रूप में ही किये थे अत: खेत में मिली मूरत भी दाढ़ी-मूंछ में पाई गयी |
मुस्लिम कारीगरो ने किया मंदिर का निर्माण :
श्री सालासर बालाजी के मंदिर का निर्माण मुस्लिम कारीगरो ने किया| कहा जाता है फतेहपुर से मुसलमान कारीगरो नूर मोहम्मद व दाऊ नामक कारीगरों को बुलाकर मंदिर बनवाया गया ।
सालासर बालाजी के मूरत का खेत से निकलना :
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राजस्थान के नागपुर जिले में असोटा गांव में के दिन एक जाट किसान अपने खेत को जोत रहा था। अचानक उसके हल से कोई चीज़ टकराई , उसने उस जगह की मिट्टी को खोदा | खोदते समय उसे एक आवाज सुनाई दी | उसे मिट्टी में सनी हुई दो मूर्तियां मिलीं। घर पहुँच कर उसने अपनी पत्नी को वो मूर्तिया दिखाई| जाटनी कपडे से जब मुर्ती को साफ़ किया जो साक्षात् हनुमान जी के दर्शन पाये | वे दोनों मुर्तियो के सामने नत्मस्तक हुए और प्यार और भाव के साथ पूजा करने लगे | यह खबर पुरे आसोटा में आग की तरह फ़ैल गयी |असोटा के को सपने में बालाजी ने आदेश दिए की इस मूरत को को चुरू जिले में सालासर भेज दिया जाये। उसी रात भगवान हनुमान के एक भक्त मोहन दासजी महाराज ने भी अपने सपने में भगवान हनुमान या बालाजी को देखा और आदेश पाया की आसोटा से एक ठाकुर कल मूरत लेकर यहा आयेंगे उस मूरत से तुम्हे सालासर में मेरा मंदिर बनाना है | आदेश पर बालाजी के कारज हुए | और समय के साथ यह मंदिर अपने भक्तो के बीच चाहेता बन गया |
दुसरी मूरत को को इस स्थान से 25 किलोमीटर दूर पाबोलाम (भरतगढ़) में स्थापित कर दिया गया।
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