महामाया शक्तिपीठ अमरनाथ
अमरनाथ धाम विश्व प्रसिद्द बर्फानी शिव लिंग के साथ महामाया शक्तिपीठ की भी भक्तो में बहूत बड़ी मान्यता है | कहते है इस जगह ही भगवान् शिव ने अपनी पत्नी पार्वती को अमरता का ज्ञान दे रहे थे | यह मंदिर भी अमरनाथ की पवित्र गुफा में ही है |
इस जगह देवी सती की गर्दन गिरी थी और इस तरह यह जगह 51 शक्तिपीठो में से एक है | यहा शिव भैरो को त्रिसंध्येश्वर के नाम से पूजा जाता है | अमरनाथ की इस पवित्र गुफा में जहां भगवान शिव के हिमलिंग का दर्शन होता है वहीं हिमनिर्मित एक पार्वतीपीठ भी बनता है. यहीं पार्वतीपीठ महामाया शक्तिपीठ के रूप में मान्य है. |
यहां भगवती सती के अंग तथा अंगभूषण की पूजा होती है. आस्थावान भक्तों में मान्यता है कि जो यहां भक्ति और श्रद्धापूर्वक भगवती महामाया के साथ-साथ अमरनाथ वासी भगवान भोलेनाथ के हिमलिंग रूप की पूजा करता है, वह इस लोक में सारे सुखों का भोगकर शिवलोक में स्थान प्राप्त करता है |
किस जगह है यह महामाया अमरनाथ शक्तिपीठ :
अमरनाथ शक्तिपीठ भारत के कश्मीर में श्रीनगर से 141 किमी की दुरी 12700 फ़ीट की ऊंचाई पर स्तिथ है |
अमरनाथ गुफा तक जाने के लिए दो रास्ते है | पहला बलतल जो श्रीनगर से 70 किमी की दुरी पर है | जबकी दुसरा रास्ता फल्गम जो 94 किमी की दुरी पर है |
यह रास्ता चन्दंवारी ,शेष्नाग और पंच्चात्रानी से हो कर गुजरता है | यह रास्ता बलतल रास्ते से ज्यादा अच्छा है और चन्दंवारी से 16 किमी की दुरी पर पवित्र अमरनाथ गुफा है |
हर साल स्थानीय सरकार शिव भक्तो के लिए वार्षिक अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था कराती है | यात्रा मुख्य रूप से जून से अगस्त तक होती है |
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