कैसे करे माँ लक्ष्मी का व्रत और पूजन
वैभवलक्ष्मी महालक्ष्मी व्रत की विधि
महालक्ष्मी व्रत जिसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है 21 शुक्रवार के लिए रखा जाता है । यह महालक्ष्मी व्रत का महत्त्व पहले भगवान कृष्ण द्वारा युधिस्ठिर को समझाया गया था ऐसा माना जाता है। यह व्रत 21 दिन के लिए देखा जाता है और भक्तो की सारी इच्छाए पूरी करता है। यह पूजा भक्तों को अपार धन , भाग्य , समृद्धि, प्रेम, खुशी , और भाग्य लाने के लिए की जाती है ऐसा माना जाता है। दिवाली की रात में भी देवी लक्ष्मी की पूजा भगवान गणेश और देवी माँ सरस्वती के साथ की जाती है। आप माँ लक्ष्मी के दिव्य मंत्र के जाप से भी धनवान बन सकते है |
माँ लक्ष्मी की पूजा कैसी करनी चाहिए ?
हर क्षेत्र और हर भक्त देवी लक्ष्मी की पूजा की पेशकश अपने तरीके से करता है। हर तरीका सही है। देवी माँ बस सच्ची भक्ति और समर्पण को देखती है। हालांकि, कुछ रस्में नीचे दी गयी हैं कि इस पूजा के लिए सूचीबद्ध किया गया है:
- १) माँ लक्ष्मी की मूर्ति को एक लकड़ी के पाठे पर रखे।
- २ ) पाठे को सफेद कपडे से ढंके मूर्ति को रखने से पहले।
- ३) माँ की मूर्ति या तस्वीर को चुन्नी या चुन्नर से ढंके ।
- ४) एक कलश को कुछ चावल डाल कर रखे ,पूजा के उत्तर पूर्व दिशा में।
- ५ )कलश में पानी और सिक्के डाले और उसके मुह को आम के पत्तों से ढँक दे।
- ६) कलश पर लाल कपड़े में लिपटे एक नारियल को रखे।
- ७) पीले चंदन , सिंदूर , हल्दी, , कुमकुम आदि के साथ कलश और नारियल पर स्वस्तिक बनाये।
- ८) अखंड ज्योति या लगातर जलते हुए घी के दिये को कलश के दक्षिण पूर्व दिशा में रखे। अगर आप "अखंड ज्योति" नहीं रख सकते तो कोई बात नहीं,बस दिया और अगरबत्ती को जलाये , पूजा की हर सुबह और शाम को।
लक्ष्मी मंत्र
ओम श्रीम ह्रीं श्रीम कमले
कमलालये प्रसीद प्रसीद
श्रीम ह्रीं श्रीम
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